शब्द एक प्रतिध्वनि है वीरान/ अकेली/ निर्वासित नगरी मे हमसफर की तरह साथ चलने के लिये...! शब्द एक प्रतिध्वनि है वीरान/ अकेली/ निर्वासित नगरी मे हमसफर की तरह साथ चलने क...
ये मेरी कुछ बेहिसाब सी कहानी है, बहुत खामोश, पर ऐसी ही ज़िंदगानी है।। ये मेरी कुछ बेहिसाब सी कहानी है, बहुत खामोश, पर ऐसी ही ज़िंदगानी है।।
उफ़... तेरी ये आंखे............. कुछ ना कहकर भी ...... बहुत कुछ कह जाती हैं ........ उफ़... तेरी ये आंखे............. कुछ ना कहकर भी ...... बहुत कुछ कह जाती है...
क्योंकि वो है सच्चे पवित्र दिल के मेरे अनमोल सपने। क्योंकि वो है सच्चे पवित्र दिल के मेरे अनमोल सपने।
अनकहे अल्फ़ाज़ तुम्हारे, मैं दिल से चुरा लेता हूँ, तू लिखे ना लिखे, मैं दास्ताँ - ए - प् अनकहे अल्फ़ाज़ तुम्हारे, मैं दिल से चुरा लेता हूँ, तू लिखे ना लिखे, मैं दास्ताँ...
देह अग्नि जल जाऊँ मैं तो नीर बहाऊँ द्रवित हृदय से पी पी टेर लगाऊँ। देह अग्नि जल जाऊँ मैं तो नीर बहाऊँ द्रवित हृदय से पी पी टेर लगाऊँ।